छठ पूजा में सूर्य की उपासना
आइए ज्योतिषाचार्य गुरुदेव संतोष त्रिपाठी से विस्तार से जानते हैं।
कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली मनाने के 6 दिन बाद कार्तिक शुक्ल को मनाए जाने के कारण इसे छठ कहा जाता है.यह पर्व चार दिन का है. इसमें साफ-सफाई का खास ध्यान रखा जाता है.
छठ पूजा के दौरान सूर्य की उपासना का विशेष महत्व है। यदि आप सही नियमों के साथ पूजा करती हैं तो घर में सदैव खुशहाली बनी रहती है।
माना जाता है कि छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं. उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए ये पर्व मनाया जाता है. जीवन के महत्वपूर्ण अवयवों में सूर्य व जल की महत्ता को माना गया है. इसीलिए इन्हें साक्षी मानकर किसी भी पवित्र नदी या तालाब के किनारे यह पूजा की जाती है.षष्ठी मां यानी छठ माता बच्चों की रक्षा करने वाली देवी मानी गई हैं. इस व्रत को करने से संतान को लंबी आयु का वरदान मिलता है.
छठ पूजा को पूरे देश में बहुत ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। इसे मनाने के कुछ खास तरीके भी हैं। बता दें कि हिंदू धर्म में छठ पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन मुख्य रूप से भगवान सूर्य की उपासना का विधान है।
छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा व उन्हें अर्घ्य देना प्रमुख होता है। ऐसी मान्यता है कि यदि आप इस दिन कुछ विशेष तरीकों से सूर्य की पूजा करती हैं और सूर्यदेव को जल चढ़ाती हैं तो छठ माता सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करती हैं।
इस दिन यदि आप विधि विधान से छठ माता की पूजा करेंगी तो आपके जीवन में सदैव सुख समृद्धि बनी रहेगी। आइए ज्योतिषाचार्य गुरुदेव संतोष त्रिपाठी जी से जानें छठ पूजा में सूर्य की उपासना की सही विधि और उनके विशेष मंत्रों के बारे में।
छठ पूजा में व्रत करने वाली महिलाओं को पूरी श्रद्धा भाव से सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि जो श्रद्धालु छठ के दौरान संध्या और सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य देते हैं उनकी पूजा छठ माता को भी स्वीकार्य होती है। सूर्य की पूजा के लिए विविध स्थानों पर अलग विधियों का प्रयोग किया जाता है लेकिन सूर्य की उपासना की शास्त्रों में बताई विधि से करना फलदायी माना जाता है।
सूर्य को अर्घ्य देते समय भक्तिभाव से भगवान सूर्य का ध्यान करें और उनकी उपासना करें। सूर्य की उपासना के समय सूर्य के विशेष मन्त्र का जाप करें। यह मंत्र 'रक्ताम्बुजासनशेषगुणैकसिन्धुं भानुं समस्तजगतामधिपं भजामि। पद्यद्वयाभयवरान् दधतं कराब्जै र्माणिक्यमौलिमरूणाडंगरिूचं त्रिनेत्रम्।। ध्यानार्थे अक्षतपुष्पाणि समर्पयामि ओम श्री सूर्याय नमः है।
छठ में ऐसे करें सूर्य पूजा (Chhath Surya Dev Puja Vidhi )
सूर्य को इस विधि से चढ़ाएं जल
छठ पूजन के दौरान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए यदि आप तांबे के लोटे का इस्तेमाल करेंगी तो ये आपके लिए लाभप्रद होगा। सूर्य को अर्घ्य देते समय सीधे सूर्य देव की ओर न देखें बल्कि गिरते हुए जल की धारा में सूर्यदेव के दर्शन करके मनवांछित फल मांगें। छठ पूज के दौरान और उसके बाद भी सूर्य को रोज जल चढ़ाएं। इससे आपके सूर्य दोष दूर हो सकते हैं।
सूर्य के विशेष मंत्र (Chhath Puja Surya Dev Mantra)
छठ में सूर्य की पूजा के साथ यदि आप सूर्य के कुछ विशेष मंत्रों का जाप भी करेंगी तो ये भी आपके लिए समृद्धि के मार्ग खोलने में मदद करेगा।
ऊँ ऐही सूर्यदेव सहस्त्रांशो तेजो राशि जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणार्ध्य दिवाकर:।।
ऊँ सूर्याय नम:, ऊँ आदित्याय नम:, ऊँ नमो भास्कराय नम:। अर्घ्य समर्पयामि।।
क्या होता है सूर्य देव को जल अर्पित करने का महत्व?
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर नहाय-खाय के साथ छठ पर्व का आरंभ होता है और अगले चार दिनों तक यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत कर के संतान प्राप्ति और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। छठ पर्व पर सूर्य को अर्घ्य देकर उनका आभार व्यक्त करना इस पूजन के मुख्य विधि में आता है।
छठ पर्व के पहले दिन स्नान करके नहाए खाए होता है उसके बाद अगला दिन खरना और फिर तीसरे दिन शाम को सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। चौथे दिन सूर्य को अर्घ्य देकर इस पर्व का समापन करते हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार ऋषि-मुनि नित्य सूर्य को अर्घ्य अन्य पूजा की शुरुआत करते थे। सूर्य को जल अर्पित करने से पवित्रता उत्पन्न होती है और महिलाएं अपना आभार सूर्य देव के प्रति प्रकट करती हैं।
आपको बता दें कि ऐसा माना जाता है कि सूर्य को अर्घ्य देने से भगवान सूर्य जीवन की कई समस्याओं से राहत देते हैं और साथ ही रोगों से भी मुक्ति मिलती है। आपको बता दें कि मान्यताओं के अनुसार छठ का पावन पर्व जीवनदायी सूर्य देव को आभार प्रकट करने का महापर्व होता है।
छठ पर घर में सुख-समृद्धि भी सूर्य देव की पूजा करने से आती है। आपको बता दें कि कई लोग इस पूजा में सूर्य को दूध से भी अर्घ्य देते हैं और अपने परिवार के लोगों के सुखी रहने की कामना भी करते हैं।
छठ में सूर्य पूजा के नियम
- जब आप सूर्य की पूजा करें तब ऐसे कपड़े पहनें जिनमें सिलाई न की गई हो।
- सूर्य की उपासना के दौरान आपको कोरे कपड़े पहनने चाहिए और ये वस्त्र साफ़ होने चाहिए।
- इस पूजा में महिलाओं को सूती साड़ी पहनानी चाहिए और पुरुषों को धोती पहनने की सलाह दी जाती है।
- ऐसे कपड़ों में ही सूर्य को अर्घ्य दें और व्रत का पालन करें।
- पूजन के दौरान सूर्य देव को आप जो भी अर्पित करें वो शुद्धता के साथ बना होना चाहिए और साफ़ होना चाहिए।
- कभी भी जूठा प्रासाद सूर्य देव को अर्पित न करें।
- छठ पूजा जल और सूर्य के महत्व को साक्षी मानकर की जाती है।
छठ पूजन के दौरान यदि आप यहां बताई विधि से सूर्य का पूजन करेंगी और यहां बताए नियमों का पालन करेंगी तो आपके जीवन में सदैव सूर्य देव का आशीष बना रहेगा।
