पेड़-पौधें जितना हमारे जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। उतना ही उनका इस्तेमाल पूजा-पाठ के लिए भी किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि पेड़-पौधों में साक्षात भगवान वास करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पेड़-पौधों को देवी-देवताओं का स्वरूप माना जाता है। इनकी विधिवत पूजा करने से मनचाहे फलों की प्राप्ति होती है और व्यक्ति का भाग्य चमक जाता है। ऐसी मान्यता है, कि पेड़-पौधों में भगवान विराजते हैं।
आइए इस लेख में जानते हैं कि दिन के अनुसार कौन से पेड़-पौधों की पूजा करनी चाहिए। जिससे व्यक्ति को कभी किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े।
सोमवार को पीपल के पेड़ की पूजा से मिलेगा भगवान शिव का आशीर्वाद
मंगलवार के दिन नीम के पेड़ की पूजा से मिलेगा पवनपुत्र हनुमान जी का आशीर्वाद
मंगलवार का दिन पवनपुत्र हनुमान को समर्पित है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से व्यक्ति के पिछले जन्म के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। वहीं अगर आपकी कुंडली में मंगल की स्थिति कमजोर है, तो मंगलवार के दिन हनुमान जी की खास पूजा-अर्चना करें। इसके साथ ही नीम के पेड़ की पूजा भी मुख्य रूप से करें, क्योंकि नीम के पेड़ का संबंध सीधे मंगल ग्रह से हैं। इस दिन नीम के पेड़ में जल अर्पित करें, इससे आपको शुभ अवसर की प्राप्ति होगी।
बुधवार को आंवले के पेड़ की पूजा से मिलेगा भगवान गणेश का आशीर्वाद
बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा करना बहुत ही उत्तम माना जाता है। इस दिन भगवान गणेश की विधिवत पूजा करनी चाहिए। इसी के साथ इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा अवश्य करें।
गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा से मिलेगा भगवान विष्णु का आशीर्वाद
शुक्रवार को केले, आंवले और तुलसी की पूजा से मिलेगा मां लक्ष्मी का आशीर्वाद
शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित होता है। इस दिन खासकर मां लक्ष्मी की पूजा करने के साथ-साथ केले, आंवले और तुलसी की पूजा करने का विधि-विधान है।
शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा से मिलेगा शनिदेव का आशीर्वाद
शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित है। अगर किसी जातक के ऊपर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या चल रही है, तो शनिवार के दिन सूर्योदय से पहले शनिदेव की पूजा करें और इस दिन खासकर पीपल के पेड़ की पूजा करना बहुत ही शुभ होता है।
रविवार के दिन किसी भी पेड़-पौधे के विशेष महत्व के बारे में नहीं बताया गया है। ध्यान रहे, इस दिन भूलकर भी तुलसी, पीपल, आंवला आदि को न छुएं।
किस पेड़ में होता है किस देवी-देवता का वास?
आंवला, तुलसी और केला
वास्तु के अनुसार आंवला, तुलसी और केले के वृक्ष पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का वास होता है। अतः तुलसी जी पर नियमित रूप से घी का दीपक जलाने से श्री हरि और देवी लक्ष्मी शीघ्र प्रसन्न होते हैं वहीं।
इसके अलावा आवंले के पेड़ का विष्णु जी से संबंध माना जाता है। मान्यता है कि एकादशी के दिन आंवले की पेड़ की पूजा करने से भगवान विष्णु जी प्रसन्न होते हैं। साथ ही साथ केले के वृक्ष की पूजा से बृहस्पतिवार देव प्रसन्न होेते हैं। अतः हर बृहस्पतिवार जल में हल्दी मिलाकर केले के पेड़ पर अर्पित किया जाता है, इससे भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।
बेल-बरगद का पेड़
बेल और बरगद के पेड़ पर भगवान शिव का वास माना जाता है। इससे जुड़ी मान्यता के अनुसार भगवान शिव की पूजा में नियमित रूप से बेलपत्र शामिल करने से जातक की सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। खासतौर पर प्रत्येक त्रयोदशी पर बरगद के पेड़ की पूजा शुभ होती है।
शमी का पेड़
प्रत्येक शनिवार को शमी के पेड़ पर सरसों के तेल का दीपक जलाने से घर परिवार की हर मुसीबत टल जाती है साथ ही साथ सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही जातक को तमाम तरह की बुरी शक्तियों के प्रभाव से भी राहत मिलती हैै। इसके अलावा भगवान शिव को भी शमी का पत्ता अर्पित किया जाता है।
कदंब का पेड़
कदंब के पेड़ देवी लक्ष्मी का वास माना गया है। मान्यता है कि कदंब के पेड़ के नीचे बैठकर यज्ञ करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
दूब घास
धार्मिक दृष्टि के अनुसार दूब घास गणपति को अधिक प्रिय है, जिसके चलते प्रत्येक बुधवार को दूब घास को हल्दी लगाकर गणेश जी को अर्पित किया जाता हैै। मान्यता है इससे जरूरों कामों में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और शुभ लाभ की प्राप्ति होती है।




